किसान बिल क्या है ? || KISAN BILL 2020 || KISAN Andolan

हमारे देश में सरकार के द्वारा लिए गए कुछ फ़ैसलों के कारण  कोई न कोई  आंदोलन घटित हो रहे हैं जो न्यूज़ चैनलों, अख़बारों पर सुर्खियाँ बने रहते हैं। इन्ही आंदोलन में से एक है किसान आंदोलन जो  काफी लम्बे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।किसान आंदोलन क्यों कर रहे ? आइए आज हम जानते हैं आखिर क्यों भारत जैसे किसान प्रधान देश में किसान और सरकार के बीच इतना मन-मोटाओ हो रखा है? सरकार द्वारा नए किसान बिल New Farm Bill 2020 में ऐसा क्या बदलाव किया गया है जिससे हमारे देश के किसान में इतना आक्रोश है। आखिर किसान आंदोलन क्यों कर रहे? नया किसान बिल क्या है  ? KISAN BILL 2020 kya hai ? MSP क्या है ? APMC क्या है?

किसान बिल २०२० क्या है ?

भारत की केंद्र में बैठी सरकार ने कृषि बिल में संसोधन करते हुए 3 KISAN BILL  को दोनों सदनों  से मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताछर कराने के बाद कानून के रूप में पारित किया है।

3 नए किसान बिल 2020 (NEW  FARM  LAW/BILL ) निम्नलिखित हैं  –  

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020
  2. मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक 2020\
  3. किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020

इन तीन किसान बिल Kisan Bill के कानून बनने के बाद से किसानों और सरकार के क्या बीच सबसे बड़ी दुविधा का कारण MSP न्यूनतम समर्थन बिल Minimum support Price को लेकर ही है। किसानों के हिसाब से नए किसान बिल के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य सिस्टम खत्म हो जाएगा वहीँ दूसरी ओर सरकार का तर्क बिलकुल विपरीत है। सरकार के हिसाब से नए किसान बिल से चली आ रही व्यवस्था में कोई फर्क नहीं पड़ेगा उल्टा किसानों का पहले से ज़्यादा फ़ायदा होगा।

नए किसान बिल 2020  में (MSP) न्यूनतम समर्थन बिल को लेकर ही सबसे ज्यादा हल्ला मचा हुआ है। नया किसान बिल क्या है? इससे पहले हमें ये जानना जरूरी है कि MSP क्या है ? Minimum Support Price kya hai? यह तय कैसे किया जाता है। किसानों को MSP से  क्या फायदा है ?

न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है ?|| What is Minimum support price || MSP kya hai ?

आजादी के बाद किसानों के हितों की रक्षा के लिए देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य  (MSP) की व्यवस्था शुरू की गई थी। MSP सरकार की तरफ से किसानों की अनाज वाली कुछ फसलों के दाम की गारंटी होती है . इस व्यवस्था के तहत अगर बाजार में किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिलता है तो सरकार किसानों से उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP पर खरीदेगी जिससे किसानों को नुकसान से बचाया जाता है। किसी भी फसल की MSP पूरे देश में एक ही होती है। सरकार अभी कुल 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। इनमें अनाज की 7, दलहन की 5, तिलहन की 7 और 4 कमर्शियल फसलों को शामिल किया गया है। धान, गेहूं, मक्का, जौ, बाजरा, चना, तुअर, मूंग, उड़द, मसूर, सरसों, सोयाबीन, सूरजमूखी, गन्ना, कपास, जूट आदि की फसलों के दाम सरकार तय करती है।

बाजार में लिस्टेड फसलों के रेट में भले ही कितनी गिरावट क्यों न अजय लेकिन  सरकार उसे तय MSP  पर ही खरीदेगी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कैसे होता है ? MSP ka Formula

फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करते समय कृषि लागत और कीमतों से संबंधित आयोग (CACP) तीन प्रमुख फॉर्म्युले पर विचार करता है – 

  1. कॉस्ट A2- वह सभी खर्च जो किसान अपनी जेब से करता है। इसमें बीज से लेकर खाद आदि, मजदूर, मशीनरी और लीज पर ली गई जमीन का खर्च भी शामिल होता है।
  2. कॉस्ट A2 + FL-खेती में किसानों के परिवार भी काफी मेहनत करते हैं और इस फॉर्म्युले में उनका मेहनताना भी जोड़ा जाता है। इसे अनपेड फैमिली लेबर (FL) कहा जाता है।
  3. कॉस्ट C2- कॉम्प्रिहेन्सिव कॉस्ट यानी लागत को कैलकुलेट करने का सबसे व्यापक फॉर्म्युला। इसमें फैमिली लेबर, जमीन का किराया और खेती के काम लगाई गई पूंजी पर ब्याज को भी शामिल किया जाता है। इसके पक्ष में ही किसान और कृषि जानकार हैं।

APMC kya hai ? 

APMC Agricultural Produce Market Committee (कृषि उपज बाजार समिति) है, इस की स्थापना राज्य सरकार द्वारा उनके प्रदेश के किसानों को कृषि की उपज बेचने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए की गई थी। किसानों को उनकी  उपज क सही मूल्य नहीं मिलना यह  सिर्फ आज की ही समस्या नहीं है। 1970 के दशक में एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग (Regulation) ऐक्ट (APMC Act) के तहत कृषि विपणन समितियां बनी थीं।APMC यह सुनिश्चित करती है कि किसानों को बिचौलिये उनकी उपज की कम कीमत देकर उनका शोषण न करें और बाद में उन्हें अधिक कीमतों पर नहीं बेचें।

नया किसान बिल क्या है ?|| Kisan Bill 2020 || New Farm Bill 2020 

केंद्र सरकार द्वारा 3 नए किसान बिल को पारित किया गया है।  आइए एक एक कर के उनके बारे में जानते हैं –

1 . आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020

इस कानून को लाने के पीछे सरकार का प्रमुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने और अनियत्रित कीमतों को नियंत्रित रखना है। केंद्र सरकार के इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान है। केंद्र सरकार का दावा है कि ऐसा करने से बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

किसान क्यों कर रहे हैं विरोध?

इस कानून को लेकर किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने बिल में यह स्पष्ट नहीं किया है कि मंडी से बाहर फसल बेचने पर किसान को अपनी फसल का न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। किसानों को डर है कि फसल उत्पादन ज्यादा होने पर व्यापारी किसानों से मंडियों के बाहर ही कम कीमत पर फसल खरीदेंगे।

2 . मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक 2020

इस कानून के अनुसार अब  से देश के किसान अपनी फसल उगाने से पहले ही व्यापारियों  से समझौता कर सकते है। इस समझौते में फसल की कीमत और उसकी गुणवत्ता जैसी बातों को शामिल किया जाएगा। इसके तहत व्यापारी को फसल की डिलीवरी के समय ही दो तिहाई राशि का भुगतान करना होगा और बाकी का पैसा 30 दिन के अंदर करना होगा। साथ ही खेत से फसल उठाने की ज़िम्मेदारी भी व्यापारी की होगी।;

किसान क्यों कर रहे हैं विरोध?

किसानों का कहना है कि सरकार ने भले ही फसल का भंडारण करने की अनुमति दे दी हो, लेकिन किसानों के पास फसल का भंडारण करने की व्यवस्था ही नहीं है जबकि व्यापारियों के पास फसल का भंडारण करने की व्यवस्था होती है। ऐसे में फसल की कीमत तय करने का अधिकार बड़े व्यापारियों या कंपनियों के पास आ जाएगा और किसानों की भूमिका ना के बराबर हो जाएगी।

3 . किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020

केंद्र सरकार के इस नए कानून के अनुसार किसान अब एपीएमसी यानी कृषि उत्पाद विपणन समिति के अलावा भी अपनी फसल कहीं भी बेच सकेगा। केंद्र सरकार का कहना है कि इस नए कानून से किसानों को मंडी से बाहर भी अपनी फसल बेचने की आजादी मिलेगी। किसान दूसरे राज्य में जाकर भी अपनी फसल बेच सकेगा। इसके अलावा किसानों को मंडियों को कोई फीस भी नहीं देनी होगी।

किसान क्यों कर रहे हैं विरोध?

इस कानून को लेकर किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने बिल में यह स्पष्ट नहीं किया है कि मंडी से बाहर फसल बेचने पर किसान को अपनी फसल का न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। किसानों को डर है कि फसल उत्पादन ज्यादा होने पर व्यापारी किसानों से मंडियों के बाहर ही कम कीमत पर फसल खरीदेंगे।

किसानों की मांगे क्या हैं ?

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि बिल के कारण पिछले कई दिनों से किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं पूरी करती  तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। किसानों की सरकार से कुछ मुख्य मांगे कुछ इस तरह है।

  1. किसानों की पहली मांग –  कि वह कृषि क्षेत्र में सुधार के नाम पर लाए गए तीनों नए बिल को सरकार रद्द कर दे और उनकी जगह नए कानून लाए। नए कानून लाने से पहले सरकार किसानों से बात करें और उनकी मांगों को नए बिल में शामिल करे।
  2. किसानों की दूसरी मांग  – केंद्र सरकार एक विधेयक लेकर आए, जिसके जरिए किसानों को लिखित में आश्वासन दिया जाए कि MSP और कन्वेंशनल फूड ग्रेन खरीद सिस्टम खत्म नहीं होगा।
  3. किसानों की तीसरी मांग –  केंद्र सरकार द्वारा लाए कृषि बिल के अलावा किसान बिजली बिल 2020 को लेकर भी विरोध प्रदर्शन कर रहे है। केंद्र सरकार बिजली कानून 2003 की जगह बिजली (संशोधित) बिल 2020 लेकर आई है। किसान संगठन इसका भी विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए केंद्र सरकार बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है। ऐसा करने से किसानों को बिजली पर मिल रही सब्सिडी और फ्री बिजली की सुविधा खत्म हो जाएगी। साथ ही बिजली का निजीकरण होने से महंगी बिजली मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।
  4. एक मांग यह भी है कि पंजाब में पराली जलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए किसानों को रिहा किया जाए। दरअसल एक प्रावधान के अनुसार पराली जलाने पर किसान को पांच साल तक की जेल और एक करोड़ रुपए का जुर्माना हो सकता है।
किसान आंदोलन 2020 केवल उत्तर भारत में ही क्यों हो रहा?

किसान आंदोलन को देख कर क्या आपने सोचा की यह आंदोलन केवल भारत के उत्तरी हिस्से जैसे पंजाब , हरियाणा में ही क्यों सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा । इसका कारण यह है कि केंद्र और राज्य की सरकारें किसानों से APMC  के अंतर्गत जो उत्पादन खरीदती हैं वो पूरे देश का औसत 10 प्रतिशत ही होता है बाकि 90 प्रतिशत किसान अपना उत्पादन खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर है। जबकि पंजाब में स्थिति बिलकुल विपरीत है ,पंजाब में 90 प्रतिशत किसानों से उनका उत्पादन सरकारें APMC की मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लेती है।

किसान आंदोलन
Source : BBC हिंदी || Pic by : HINDUSTAN TIMES

इससे 10 प्रतिशत किसान ही अपना उत्पादन खुले बाजार में बेचते है। इस समय पूरे देश में लगभग 6,000 एपीएमसी में से 33 फीसदी अकेले पंजाब में ही हैं। ऐसे में यहां के किसानों को गेहूं और चावल के दाम मध्यप्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों से ज्यादा मिलते है। यहीं कारण है कि केंद्र सरकार के नए बिल का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में देखा जा रहा है। किसानों को डर है कि अगर वह एपीएमसी के सिस्टम से बाहर जा कर अपना माल बेचेंगे तो प्राइवेट व्यापारी उनका शोषण करेंगे जिसके कारण उत्तर भारत के किसान आंदोलन पर उतर आए हैं ।

 

निष्कर्ष :

उम्मीद करता  हूँ  कि आप सभी को किसान आंदोलन , नया किसान बिल क्या है ? किसान बिल 2020, MSP क्या  है ? से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी इस article के माध्यम से आपतक पहुँचाने में सफल रहा  हूँ। यदि आपको लगता है इस आर्टिकल में दी जानकारी में किसी प्रकार का संसोधन जरुरी है तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

जानकारी को शेयर जरूर करें ताकि सभी लोगों को देश में चल रहे आंदोलन के कारण पता चल सके क्युकी लोगों को आंदोलन तो पता होते हैं कित्नु उनके पीछे की जानकारी का अभाव होता है।

आपके Comment  प्रेरणास्रोत हैं-

Sources:

  1. https://navbharattimes.indiatimes.com/ 
  2. https://www.bbc.com/hindi
  3. https://www.zeebiz.com/hindi/

3 thoughts on “किसान बिल क्या है ? || KISAN BILL 2020 || KISAN Andolan

  • December 16, 2020 at 3:07 pm
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    Nayi information dene k liye shukriyaaa

    Reply
  • December 16, 2020 at 10:53 pm
    Permalink

    संक्षिप्त में बहुत ही सुंदर और सरल भाषा मे

    Reply
  • December 25, 2020 at 11:42 am
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    इतने कम शब्दों मे और इतने अच्छे से किसी भी जानकारी को बताना भी एक कला है और आप अब इसमे माहिर हो रहे हैं. धन्यवाद

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