नॉएडा सेक्टर-93A में सुपरटेक की एमराल्ड कोर्ट की परियोजना में गड़बड़ी भ्रष्ट बिल्डर और प्राधिकरण अधिकारियों ने 23 नवंबर 2004 में ने शुरू कर दी थी।

23 नवंबर 2004 को से ही जमीन आवंटन के बाद इसकी पैमाइश में लापरवाही बरती गई। शुरुवात में 9 मंजिल के 14 टावर बनाने की मंजूरी प्राधिकरण अधिकारियों ने दी।

29 दिसंबर 2006 को प्राधिकरण ने 14 टावर में 9 को , 11 मंजिल में बदल दिए जिसे कुछ समय बाद ही 15 मंजिल में भी बदल दिया गया। 2009 आते आते ये संख्या 17 में संसोधित करदी गई।

एक बार फिर टावर की ऊंचाई 121 मीटर करदी गई जिसे मंजिलो की संख्या 40 और 39 तक बढ़ाने की अनुमति मिल गई।

एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी के निवासियों के सब्र का बांध तब टूटा जब नियम के विपरीत दोनों टावर के बीच की दूरी को 16 मीटर के बजाए 9 मीटर कर दी गई।

सुरपटेक एमराल्ड के घर खरीदार बिल्डर से नक्शा दिखाने की मांग करते करते तीन साल तक प्राधिकरण द्वारा उनकी मांग को टरकाते रहे।

क्युकी बिल्डर ने नक्शा सार्वजनिक नहीं किया , बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक परियोजना की निर्माण साइट पर नक्शा लगा होना अनिवार्य है।

2009 में आरडब्ल्यूए का गठन हुआ और खरीदारों ने 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट रुख करने का फैसला लिया ।

बिल्डर ने चालाकी दिखाते हुए ,मामले के हाई कोर्ट पहुँचते ही 13 मंजिल की ईमारत को महज ढेड़ साल में 19 मंजिल तक बनवा दिया।

ऐसा केवल इसलिए किया गया ताकि हाई कोर्ट बिल्डर के अगेंस्ट कोई फैसला न ले पाएं।

 जांच रिपोर्ट के बाद 24 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

भ्रष्टाचार का आलम ये था की 12 एकड़ में जितना निर्माण होना था , उतना 1.6 एकड़ में करने की तयारी थी।

मगर बिल्डर की ये चालाकी काम नहीं आई और 31 अगस्त 2021 को Noida Twin Tower को गिराने का फैसला हाई कोर्ट ने सुना दिया।

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