हल्दी के फायदे और नुकसान || Benefits of Turmeric

आज के इस Corona युग में आए दिन हम इस बीमारी से बचने के लिए अलग अलग दवाओं के बारे में सुन रहे हैं। ये सारी दवाएं हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम या रोग प्रतिरोधक क्षमता को और बेहतर बनाने पर आधारित हैं। लेकिन दवाओं के सहारे जीवन व्यतीत करना कोई अच्छी बात नहीं है। भारतीय संस्कृति में आदि काल से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमारे आपके घरों में घरेलु नुस्खों , मसालों और तौर तरीकों  को अपनाया जाता रहा  है। आज भी भारतीय वैदिक पद्दति,नुस्खों का विश्व पटल पर एक अलग स्थान प्राप्त है।  भारतीय मसाले इन नुस्खों में एक एहम भूमिका निभाते आरहे हैं। आज हम ऐसे ही एक मसाले के बारे में आप सभी को जानकारी देंगे जो हर किसी के घरों में , रोज बनने वाले खानों में उपयोग होता है। इस मसाले के बिना हमारा खाना अधूरा है,“हल्दी” जिसे इंग्लिश में Turmeric, आयुर्वेद में हरिद्रा और scientifically curcumin कहते हैं। आज का ब्लॉग आर्टिकल  हल्दी के फायदे और नुकसान Haldi ke fayde Benefits of Turmeric आप सभी को जानकारी देना हैतो आइए हल्दी के फायदे (Haldi ke fayde in Hindi ) जानने से पहले जानते हैं हल्दी के बारे में ।

हल्दी के फायदे | Benefit of Turmeric | Haldi ke Fayde

हल्दी क्या है और हल्दी का इतिहास

हल्दी अदरक की प्रजाति का 5-6  फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है।  आयुर्वेद में हल्‍दी को महत्‍वपूर्ण औषधि‍ का दर्जा प्राप्त है। औषधि ग्रंथों में हल्दी के अतिरिक्त इसे  हरिद्रा, कुरकुमा लौंगा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिमिघ्ना योशितप्रीया, हट्टविलासनी, हरदल, कुमकुम के नाम से जाना जाता है। भारतीय किचन के मसालों में हल्दी एक मुख्य मसाला ही नहीं बल्कि किसी भी शुभ कार्य में , पूजा पाठ में हल्दी को एक पूजा सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है। 600 ई.पू. हल्दी को एक प्रकार की डाई की तरह रंगने के लिए उपयोग किया जाता था। पीले रंग का होने के कारण इसे शुभ माना जाता था और पुजारियों के वस्त्रों को रंगने में भी प्रयोग किया जाता था।

मार्को पोलो ने 1280 की अपनी चीन यात्रा के दौरान हल्दी को केसर का दर्जा दिया था। मध्य यूरोप में हल्दी को “भारतीय केसर ” भी कहा जाता था। इसके औषधिक गुण  का पता चलने के बाद हल्दी को आयुर्वेद ,सिद्ध चिकित्सा, पारंपरिक चीनी चिकित्सा और  यूनानी चिकत्सा में प्रयोग किया जाने लगा। 

Turmeric name in different languages:

Name of Haldi in English Turmeric (टर्मेरिक्)
Name of Haldi in Sanskrit हरिद्रा, काञ्चनी, पीता, निशाख्या, वरवर्णिनी, रजनी, रंजनी, कृमिघ्नी, योषित्प्रिया, हट्टविलासिनी, हलदी, गौरी, अनेष्टा, हरती
Name of Haldi in Hindi हलदी, हर्दी, हल्दी
Name of Haldi in Urdu हलदी (Haladi)
Name of Haldi in Asam हलादी (haladhi)
Name of Haldi in Konkani हलद (Halad)
Name of Haldi in Kannada अरसिन (Arsina), अरिसिन (Arisin)
Name of Haldi in Gujrati हलदा (Halada)
Name of Haldi in Tamil मंजल (Manjal)
Name of Haldi in Bengali पसुपु (Pasupu), पाम्पी (Pampi)
Name of Haldi in Punjabi हलदी (Haldi), हलदर (Haldar)
Name of Haldi in Marathi हलद (Halade), हलदर (Haldar)
Name of Haldi in Malyalam मन्जल (Manjal), मन्नाल (Mannal), पच्चामन्नाल ( pacchamannal)
Name of Haldi in Arabi उरुकेस्सुफ (Urukessuf), कुरकुम (Kurkum)
Name of Haldi in Persian जर्द चोब (Zard chob), दारजरदी (Darjardi)

हल्दी की प्रजातियाँ 

हल्दी की मुख्य रूप से निम्नलिखित चार प्रजातियों का प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

  • Curcuma longa : हल्दी की इस प्रजाति का उपयोग मुख्य रुप से मसालों और औषधियों के रूप में किया जाता है। इसके पौधे 60-90 सेमी तक ऊँचें होते हैं। इस हल्दी का रंग अंदर से लाल या पीला होता है। यही वह हल्दी है जिसका उपयोग हम अपने घरों में सब्जी बनाने में करते हैं।
  • Curcuma aromatica:  इसे जंगली हल्दी कहते हैं।
  • Curcuma amada: इस हल्दी के कन्द और पत्तों में कपूर और आम जैसी महक होती है। इसी वजह से इसे आमाहल्दी (Mango Ginger ) कहा जाता है। 
  • Curcuma caesia: -इसे काली हल्दी कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस हल्दी में चमत्कारिक गुण होते हैं। इस हल्दी का उपयोग ज्योतिष और तंत्र विद्या में ज्यादा होता है।
हल्दी में क्या पाया जाता है ?
हल्‍दी में कई प्रकार के रासाय‍निक पोषक तत्‍व पाये जाते हैं —
  • एक प्रकार का सुगंधित उडनशील तेल 5.8 %, गोंद जैसा पदार्थ, कुर्कुमिन नामक पीले रंग का रंजक द्रव्य, गाढा तेल पाये गये हैं।
  • इसके मुख्य कार्यशील घटक टर्मरिक ऑयल तथा टर्पीनाइड पदार्थ होते हैं।
हल्‍दी में पाये जाने वाले आवश्‍यक तत्‍व –

जल 13.1 % ग्राम,  खनिज पदार्थ (लवण) 3.5 % ग्राम, प्रोटीन 6.3 % ग्राम, वसा 5.1 % ग्राम, कैल्शियम 150 मिलीग्राम प्रतिशत, फास्फोरस 282 मिलीग्राम प्रतिशत,रेशा 2.6 % ग्राम, कारबोहा‍‍इड्रेट 69.4 % ग्राम,  लौह 18.6 मिलीग्राम प्रतिशत, फाइबर, मैग्नीशियमपोटेशियमविटामिन ए 50 मिलीग्राम प्रतिशत, विटामिन-ए 50.U./100 ग्राम,  विटामिन बी 6 व सी, नियासिन, विटामिन बी 3 मिलीग्राम प्रतिशत,ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड हैं।


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हल्दी का भारतीय संस्कृति में उपयोग

भारतीय संस्कृति में हल्दी को पवित्र और शुभता का प्रतीक माना जाता है।  शायद ही कोई ऐसा घर हो जहाँ हल्दी का उपयोग न होता हो। हिन्दू धर्म में पूजा-अर्चना से लेकर पारिवारिक संबंधों की पवित्रता तक में हल्दी का उपयोग होता है।

  • हल्दी को शुभता का संदेश  माना जाता  है। आज भी भारतीय घरों में ही नहीं बल्कि विदेशों में जो भारतीय हैं किसी नई वास्तु जैसे गाड़ी ,घर आदि में हल्दी का उपयोग करते हैं। 
  • वैवाहिक कार्यक्रमों में हल्दी का उपयोग का अपना एक विशेष महत्व है। जब  विवाह का निमंत्रण छपवाकर भेजा जाता है, तब निमंत्रण पत्र  को हल्दी के रंग से स्पर्श कराया जाता है। कहते हैं कि इससे रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है।
  • दूल्हे व दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाकर वैवाहिक कार्यक्रम करवाए जाते हैं। इससे सुंदरता में निखार आता है। 
  • ब्राह्मणों में पहना जाने वाला जनेऊ तो बिना हल्दी के रंगे पहना ही नहीं जाता है। जब भी जनेऊ बदला जाता है तो हल्दी से रंगे जनेऊ को ही पहनने की प्रथा है। इसमें सब प्रकार के कल्याण की भावना निहित होती है। ग्रामीण अंचलों में आज भी साड़ी को रंगने में हल्दी का प्रयोग किया जाता है। हल्दी और चूने को आपस में मिलाकर कुंकुम बनाया जाता है।
  • तंत्र-ज्योतिष में भी हल्दी का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। तंत्रशास्त्र के अनुसार, बगुलामुखी पीतिमा की देवी हैं। उनके मंत्र का जप पीले वस्त्रों में तथा हल्दी की माला से होता है।

हल्दी के फायदे  (Haldi ke fayde in Hindi)

आपको हल्दी से जुड़ी कुछ मत्वपूर्ण जानकारी मिल गई होगी ,आइये अब जानते हैं “हल्दी के फायदे ” क्या हैं। क्यों इसे एक औषधी का दर्जा प्राप्त है।

त्वचा में हल्दी के फायदे (Benefits of Turmeric)

  • हल्दी खून को शुद्ध करके हमें किसी भी प्रकार के चार्म रोग से बचाती है। इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा में चमक और निखार आता  है।
  • हल्दी का उबटन लगाने से शरीर की कांति बढ़ती है और मांसपेशियों में कसाव आता है।
  • हल्दी चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयों को दूर करती है।
  • बेसन में पिसी हुई थोड़ी सी हल्दी, दूध या मलाई मिला कर चेहरे पर लगाने से दाग़ और झाइयां दूर होती हैं, चहरे पर निखार आता है।
  • घाव, कटे एवं पके हुये घावों में हल्‍दी का चूर्ण छिड़कने से घाव शीघ्र भरते हैं।

मधुमेह में हल्दी के फायदे :शहद मिलाकर सुबह- शाम सेवन करने से डायबिटीज में फायदा (haldi ke fayde)  मिलता  है।

पेट दर्द में हल्दी के फायदे (Haldi beneficial in Stomach pain ) :पेट दर्द होने पर भी हल्दी का सेवन करने से दर्द से जल्दी आराम मिलता है। 10 ग्राम हल्दी (haldi)को 250 ml पानी में उबाल लें। पेट दर्द होने पर इसमें गुड़ मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पियें।

चोट की सूजन में : अगर चोट पर ख़ून निकल जाने के बाद सूजन आ गई हो तो हल्दी को खाने वाले चूने के साथ मिलाकर लेप लगा देने से पकने की नौबत नहीं आती तथा सूजन दूर हो जाती है।

  • एलर्जी, जलन आदि पड़ जाने की तकलीफ में हल्‍दी को पानी के साथ पेस्‍ट जैसा बनाकर लगाने से आराम मिलता है।
    हल्दी में एक एंटीसेप्टिक गुण होता है ऐसे में घाव, कटे एवं पके हुये पर हल्‍दी का चूर्ण छिड़कने से घाव शीघ्र भरते हैं और इन्फेक्शन नही होता। मोच या हड्डी टूट जाने पर हल्दी का लेप लगाएं।
  • हल्दी में Curcumin नाम का तत्व पाया जाता है जो एंटीऑक्सीडेंट ,एंटीकैंसर एजेंट की तरह काम करता है। 
  • फोड़ा फुन्‍सी पकाने के लिये हल्‍दी की पुल्टिस रखने से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं।
  • बिच्छू, मक्खी जैसे किसी विषैले कीड़े के काटने पर हल्दी का लेप लगाना चाहिए।
  • इस्‍नोफीलिया में हल्‍दी का प्रयोग बहुत सटीक है। 2 से 3 ग्राम हल्‍दी चूर्ण गुनगुने पानी से, दिन में तीन बार, खाने से, इस रोग में आराम मिलती है।
  • हल्दी रक्त संचार को बढाने में मदद करती है साथ ही साथ रक्त कणिकाओं को मज़बूत बनाती है। हल्दी एल.डी.एल कोलेस्ट्रॉल को कम करती है।
  • कनाडा में हुए एक शोध के मुताबिक़ हल्दी न सिर्फ हार्टअटैक के खतरे से बचाती है बल्कि क्षतिग्रस्त हृदय की मरम्मत भी करती है।
ज्यादा हल्दी के नुकसान 

अति सर्वत्र वर्जयेत् – अति किसी भी चीज़ की नुकसान पहुँचाती है। अधिक मात्रा में हल्दी का सेवन भी नुकसान पहुँचाता है

  • हल्दी खून का थक्का जमने नहीं देता है। जिसकी वजह से खून का स्त्राव बढ़ जाता है। अगर आपकी सर्जरी हुई है या फिर होने वाली है तो हल्दी के सेवन से बचें। 
  • हल्दी का बहुत अधिक सेवन करने से आयरन का अवशोषण बढ़ जाता है।  जिन लोगों में पहले से ही आयरन की कमी है उन्हें बहुत सोच-समझकर हल्दी का सेवन करना चाहिए।
  • हल्दी में एक रासायनिक पदार्थ करक्यूमिन पाया जाता है। जो ब्लड शुगर को प्रभवित करता है ऐसे में अगर आपको मधुमेह है तो हल्दी वाला दूध पीने से परहेज करना।
  • अगर पहले से ही एनीमिया की समस्या से जूझ रहे हैं तो हल्दी के सेवन से दूर रहें।

निष्कर्ष:

आशा करता हूँ आप सभी को हल्दी के फायदे (haldi ke fayde in hindi) ब्लॉग आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा।
जानकारी कैसी लगी ? Comment बॉक्स में जरूर बताएं। जानकारी को शेयर जरूर करें।
आपके Comment  प्रेरणास्रोत हैं। 

डिस्क्लेमर :

यह ब्लॉग पोस्ट स्वास्थ्य और संबंधित विषयों के बारे में सामान्य जानकारी और चर्चा प्रदान करता है। इस ब्लॉग में लिंक या की गई सामग्री में दी गई जानकारी और अन्य सामग्री को   चिकित्सीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, और न ही यह जानकारी पेशेवर चिकित्सा विशेषज्ञता या उपचार का विकल्प है।

इस ब्लॉग और वेबसाइट पर व्यक्त की गई राय और विचारों का किसी भी शैक्षणिक, अस्पताल, स्थ्य अभ्यास या अन्य संस्थान से कोई संबंध नहीं है। 

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