[2022-23] शेयर बाजार में IPO क्या होता है? IPO Full-Form और IPO में निवेश कैसे करें?

हाल के दिनों में या यूँ कहें पिछले पिछले दो सालो से स्टॉक मार्केट में NSE और BSE में लगभग 100 से ऊपर कम्पनिया स्टॉक मार्केट में IPO के जरिये लिस्ट हुई हैं। स्टॉक मार्केट क्या होता है ये तो आपक लोगों को पता ही होगा। शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए कम्पनिया IPO निकालती हैं। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की IPO क्या होता है , कंपनियां IPO क्यों और कैसे ऑफर करती हैं ? IPO Full-Form,  IPO कैसे काम करता है ? आईपीओ के फायदे और  नुकसान के साथ हम यह भी जानेगे की आईपीओ कितने प्रकार का होता है और और आप आईपीओ में कैसे निवेश करते हैं। जानकारी के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए –

IPO Full Form in Hindi 

IPO का फुल फॉर्म होता है Initial Public Offering हिंदी में जिसे आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) यह पहली बार होता है जब किसी निजी कंपनी का स्टॉक जनता को खरीद के लिए उपलब्ध कराया जाता है। 

शेयर बाजार में IPO क्या होता है? What is IPO Meaning in Hindi  

IPO का अर्थ है इनीशियल पब्लिक ऑफर। जब कोई भी ऐसी कंपनी पब्लिक से पैसे जुटाना चाहती है, जो कभी एक छोटी कंपनी हुआ करती थी पर अब उसकी बाज़ार में अच्छे स्तर पर वृद्धि हो चुकी है, तब वह कंपनी पहली बार अपने शेयर्स को आम पब्लिक द्वारा खरीदे जाने के लिए बेचा करती है, और इसी को इनीशियल पब्लिक ऑफर कहा जाता है। ऐसा करने के लिए उस कंपनी को स्टॉक मार्केट में सूचिबद्ध होना पड़ता है। 

कंपनियां IPO क्यूँ और कैसे ऑफर करती हैं?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए कंपनियों के फंडिंग स्तरों को समझना अनिवार्य है। कोई भी कंपनी शुरू होती है आपने संस्थापक की सेविंग्स के पैसों से, इस निवेश को प्रमोटर फंडिंग कहा जाता है। ये फंडिंग का पहला स्तर होता है। दूसरे स्तर पर, जब कंपनी की कुछ वृद्धि होने लगती है तब ऐंजल इनवेस्टर्स उसे फंड करते हैं। तीसरे स्तर पर वेंचर कैपिटल फर्म्स या प्राइवेट इक्विटी फर्म्स कंपनी में निवेश किया करती हैं। और इनके बाद आता है चौथा स्तर यानि IPO इसके लिए सबसे पहले कंपनी नैशनल स्टॉक एक्सचेंज या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध की जाती है। और फिर अलग-अलग प्रकार के इनवेस्टर्स इस IPO में निवेश किया करते हैं। IPO इक्विटी फंड्स जुटाने का एक अच्छा तरीका है। 

कोई भी कंपनी IPO तब ऑफर करती है जब:

  1. कंपनी का विस्तार किया जाने वाला हो क्योंकि ऐसा करने के लिए फंड्स की आवश्यकता होती है।
  2. कंपनी को अतीत में लिए गए कर्ज़ उतारने हों तो यह डेट चुकाने के लिए धन एकत्रित करने का अच्छा तरीका माना जाता है।
  3. कंपनी के शुरूआती इनवेस्टर्स कंपनी से एग्ज़िट चाहते हों। क्योंकि IPO में इनवेस्टर्स की मात्रा अधिक होने के कारण इन्वेस्टमेंट की लिक्विडिटी बहुत बढ़ जाती है।

IPO कैसे काम करता है?

आईपीओ के काम करने के निम्लिखित तरीके हैं जो नीचे आपको स्टेप वाइज बताएगे हैं :

  • कोई भी कंपनी जो पब्लिक इशू लेकर आना चाहती है वह स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने के लिए सबसे पहले एक इन्वेस्टमेंट बैंक को इस काम के लिए नियुक्त करती है। इन्वेस्टमेंट बैंक को मर्चेंट बैंक भी कहा जाता है। बैंक की नियुक्ति करने से पूर्व वह कंपनी इन्वेस्टमेंट बैंक का पूर्ण विश्लेषण किया करती है, जैसे बैंक की प्रतिष्ठा, उसका ट्रैक रिकॉर्ड, वह बैंक कितनी अच्छी मार्केटिंग कर सकता है (अर्थात उसकी डिस्ट्रीब्यूशन एक्सपर्टीज़ कैसी है), इत्यादि। 
  • फिर वह कंपनी ड्यू डिलिजेंस या फाइलिंग की प्रक्रिया को पूरा करती है (यानि कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करती है)। इसके अधीन सबसे महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया अंडर राईटिंग की होती है जिसके तहत कई प्रकार के समझौते किए जाते हैं जैसे, फर्म कमिटमेंट (बैंक कंपनी को यह गारंटी देता है कि IPO से एक न्यूनतम राशि कंपनी को प्राप्त होगी, अगर इस न्यूनतम राशि से अधिक धन की प्राप्ति होती है तो वह बैंक का मुनाफ़ा होगा और अगर न्यूनतम राशि से कम धन प्राप्त होता है तो बची हुई धनराशि बैंक अपनी ओर से कंपनी को देगा), बेस्ट एफर्ट्स कमिटमेंट (अर्थात बैंक अपनी ओर से शेयर्स बेचने का संपूर्ण प्रयास करेगा परंतु सब्सक्रिपशन कितना होगा बैंक इसकी गारंटी नहीं लेता), सिंडिकेट अंडर राईटिंग (अगर IPO बहुत बड़ा है तो मुख्य बैंक बहुत से बैंकों को नियुक्त कर उनमें IPO के छोटे -छोटे हिस्से बाँट देता है और फिर ये सारे बैंक एक ही कंपनी के IPO बेचते हैं)।
  • अंडर राईटिंग के बाद कंपनी की सारी जानकारी रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस नामक एक दस्तावेज में लिखी जाती हैं। फिर बैंक कंप्लायंस और फाइलिंग की प्रक्रिया पूर्ण करता है। 
  • अगली प्रक्रिया मूल्य निर्धारण की होती है जिसमें यह तय किया जाता है कि कंपनी के कितने प्रतिशत शेयर्स को बेचने की आवश्यकता है (इसको इशू साइज़ कहा जाता है), हर शेयर का क्या मूल्य होना चाहिए (इसको इशू प्राइस कहा जाता है), शेयर्स की संख्या कितनी होनी चाहिए, न्यूनतम लॉट साइज़ कितना होना चाहिए यानि एक इनवेस्टर को न्यूनतम कितने शेयर्स खरीदना अनिवार्य है। 
  • इसके पश्चात इन्वेस्टमेंट बैंक और कंपनी मिल कर डिस्ट्रीब्यूशन की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं जिसमें इशू को क्वालीफाइड इंस्टिट्यूशनल बायर्स, नॉन-इंस्टिट्यूशनल इनवेस्टर्स, और रीटेल इनवेस्टर्स में बेचा जाता है।
  • इसके पश्चात ऐप्लिकेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। कई बार IPO में ओवर सब्सक्रिपशन भी हो जाती है, ऐसी परिस्थिति में हर किसी को शेयर मिले ऐसा ज़रूरी नहीं होता।
  • ऐप्लिकेशन प्रक्रिया के बाद शेयर अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है और फिर स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी की लिस्टिंग होती है।
IPO कितने प्रकार का होता है?

IPO के मूल्य निर्धारण में दो प्रकार के इशू होते हैं, 

  1. फिक्स्ड प्राइस इशू- जिसके तहत हर शेयर का एक निश्चित मूल्य पहले ही निर्धारित कर दिया जाता है।
  2. बुक बिल्डिंग इशू– जिसके तहत शेयर्स का एक प्राइस बैंड निर्धारित किया जाता है, फिर आने वाली ऐप्लिकेशन्स को मद्देनजर रखते हुए शेयर्स का निश्चित मूल्य तय किया जाता है। प्राइस बैंड की न्यूनतम और अधिकतम राशि के बीच 20% से ज़्यादा का अन्तर नहीं हो सकता।
IPO में कैसे निवेश करें? आईपीओ कैसे खरीदें 

नियमों के मुताबिक IPO में 50% कोटा क्वालीफाइड इंस्टिट्यूशनल बायर्स के लिए होता है, 15% कोटा नॉन-इंस्टिट्यूशनल इनवेस्टर्स (जो 2 लाख या उससे अधिक राशि निवेश करना चाहते हैं) के लिए होता है, एवं 35% कोटा रीटेल इनवेस्टर्स (जो 2 लाख से कम राशि निवेश करना चाहते हैं) के लिए होता है। 

IPO में निवेश करने के लिए या यूँ कहे आईपीओ खरीदने के लिए DEMAT अकाउंट का होना आवश्यक है। डीमैट अकाउंट क्या होता है जानिए और अकाउंट खोलने के पश्चात किसी भी कंपनी के IPO में निवेश किया जाता सकता है। IPO में UPI और नेट बैंकिंग से निवेश करने के विकल्प उपलब्ध हैं। UPI का इस्तेमाल करने के लिए ब्रोकरेज फर्म की ऐप या वेबसाइट द्वारा निवेश किया जा सकता है। नेट बैंकिंग द्वार निवेश करने की प्रक्रिया को ASBA प्रक्रिया कहा जाता है। परंतु IPO में निवेश करने से पूर्व कंपनी को स्टडी करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इससे कंपनी का भविष्य में क्या हाल रहेगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है। ओवर सब्सक्रिपशन की परिस्थिति में IPO का कंप्युटर लॉट्री के द्वारा अलॉटमेंट किया जाता है। आम तौर पर IPO 3-5 दिनों के लिए खुलते हैं, जिसकी जानकारी कई वेबसाइट्स पर मिल जाती है।

IPO में निवेश करने से पूर्व कंपनी से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। IPO में निवेश सदैव फायदेमंद रहे ऐसा आवश्यक नहीं है। निवेश करने से पहले उससे संबंधित सभी जानकारियाँ प्राप्त कर लेने में समझदारी है। अतः किसी भी IPO में सोच-समझकर ही निवेश करें।

IPO में निवेश करने के फायदे और नुकसान क्या हैं ? IPO Advantages and Disadvantages 

Initial Public Offering में निवेश करने से निवेशकों को किसी कंपनी का शेयर उसके मिनिमम प्राइस बैंड में मिलने की उम्मीद होती है। मिनिमम प्राइस बैंड में शेयर मिलने पर निवेशक भविष्य में प्राइस ऊपर जाने पर अच्छी कमाई या रिटर्न हासिल करने में सफल होता है। मगर आईपीओ में निवेश करने के नुकसान भी हैं जिसका उदाहरण हम LIC के आईपीओ से देख सकते हैं। LIC का आईपीओ 949 रूपए/प्रति शेयर के हिसाब से लिस्ट हुआ था। ऐसा मन जारहा था कि LIC जैसी पुरानी सरकारी कंपनी और विश्व की सबसे बड़ी कंपनी के आईपीओ में निवेश करना फायदेमंद रहेगा। मगर जिन भी लोगों ने इसमें निवेश किया उन्हें काफी घाटे सौदा देखें की मिला। LIC का शेयर आज का बाजार (3 अक्टूबर 2022) के दिन बाजार बंद होने के समय 620 रूपए/प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहा था। इससे हमें यह पता चलता है की , आईपीओ में निवेश मुनाफे का सौदा साबित हो यह जरुरी नहीं। निवेशक को इससे काफी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

 

निष्कर्ष:

आशा करता हूँ आप सभी को आईपीओ क्या होता है ? IPO Full-Form और आप आईपीओ में कैसे निवेश कर सकते हैं की जानकारी मिल गई होगी। आईपीओ में निवेश करने के नुकसान भी हैं और अपने फायदे भी हैं तो  निवेश अच्छे एनालिसिस के बाद ही करें। अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो कमेंट करके जरूर बताएं।

 

Guest Post Writer :

यह लेख Guest Post के रूप में गुरुकुल99 के संस्थापक पारस गोयल जी के द्वारा लिखा गया है। यदि आपको मोटिवेशनल स्टोरीज के साथ साथ संस्कृत या हिंदी श्लोक पढ़ने में रुचि है तो आप इनके ब्लॉग Gurukul99 पर जरूर से जरूर विजिट करें।